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afzalkhan


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लेख लिखो इनाम जीतो

Posted On: 9 Apr, 2014  
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अल्लाह का प्रकोप मुसलमानो पे चंगेज़,हलाकू की शकल मे

Posted On: 7 Feb, 2014  
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हिन्दू शासको ने भी मंदिर तोड़े एंव लुटे

Posted On: 19 Dec, 2013  
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औरंगज़ेब अकबर से अधिक धर्मनिरपेक्ष था !

Posted On: 15 Dec, 2013  
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इस्लामी कानून सजा तक ही सीमित क्यों?

Posted On: 13 Dec, 2013  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

लगता है आप ने लेख सही तरह नही पड़ा है, अगर उस ने मंदिर को टोडा भी है तो बहुत से मंदिरो को दान भी दिया है, जिस तरह उस पर इल्जाम लगाया जाता है मंदिर तोड़ने का अगर सच्ची होती तो 50 साल मे भारत मे एक भी मंदिर नही बचनी चाहिये थी. अफ़ज़ल ख़ानऔरंगज़ेब को इतिहास मे सब से ज्यादा एक मंदिर विध्वंस के रूप मे पेश किया गया है , जब के हक़ीक़त इस से उल्टा है. शोमेश्वर नत महादेव मंदिर-अलाहाबाद,जगनम बड़ी शिव मंदिर-बनरस, उनन्द मंदिर-गुवाहटी आदि मंदिरो के सहायता के दस्तावेज़ अभी तक मौजूद है.मंदिरो के रक्षा और दूसरे खर्चो के लिये अनुदान देने का सिलसिला औरंगज़ेब की हुकूमत मे भी जारी रहा. औरंगज़ेब के समय के ऐसे बहुत दास्तवेज़ है जिन से पता चलता है के ऑरज़र्ब ने इलाहाबाद, बनारस, उज्जैन, चित्रकूट के मंदिरो के अलावा और भी बहुत से मंदिरो को भी अनुदान दिया. आप को विशम्भरनाथ पांडे की किताब को देखना हो गा जिस मे दस्तावेज़ की कॉपी भी मिलेगी अगर आप चित्रकूट बालाघाट के दी मंदिर बला जी और विष्णु मंदिर जायेगे तो वहा अभी भी मंदिर मे औरंगज़ेब द्वारा सहायता किये गये के लिये अभी तक उस मे पत्थर लगा है. जहा तक मंदिर तोड़ने का इल्जाम है तो उस मंदिर को तोडा गया जहा पे हुकूमत के खिलाफ साजिश रची जाती थी या गलत काम होता था. उन मंदिरो को भी टोडा गया जहा दीवारो पे मैथून करते मूर्तिया थी या पूरे मंदिर पे कम्सुत्र के स्टॅच्यू बने थे. आप आज भी खजुराओ के बहुत से मंदिर मे अपने परिवार के साथ नही जा सकते.

के द्वारा: afzalkhan afzalkhan

इतिहास में रुचि होने के कारण आपका यह लेख मेरे लिए बहुत ही अधिक ज्ञानवर्धक रहा ....यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि इतिहास विज्ञों ने औरंगज़ेब को ही क्यों इतना धूमिल दिखाया जबकि अकबर को महान घोषित कर दिया....हाँ , ऐसा आज भी होता है जब कोई व्यक्ति अपने उसूलों से प्यार कर नेक काम की राह पर चलने लगता है तो उसकी छवि गलत करने की पुरजोर कोशिश की जाती है...और वह व्यक्ति नहीं समझ पाता कि उसे समाज में धूमिल छवि के साथ पेश किया जा रहा है...वह जानने की ज़रुरत भी नहीं समझता क्योंकि उसे स्वयं पर विश्वास होता है..पर इतिहास तो उसे गलत साबित कर ही देता है. एक अच्छे नयी जानकारी भरे ब्लॉग के लिए आपका शुक्रिया साभार

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak




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